कोई भी व्यक्ति अपना भविष्य नहीं जानता। ऐसे में भविष्य में अचानक घटित होने
वाली दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के परिणामों से सुरक्षा के लिए वह टर्म इंश्योरेंस की
खरीद करता है। चूंकि टर्म इंश्योरेंस जीवन के जोखिम के विरुद्ध एक सुरक्षा योजना
है, ऐसे में प्रीमियम
कही जाने वाली छोटी सी राशि एक नियमित समय पर चुकता करते रहने से वह व्यक्ति न
केवल मानसिक शांति खरीद लेता है, बल्कि वह इस बात की गारंटी भी हासिल कर लेता है कि यदि भविष्य में उसके साथ
कोई अवांछित घटना हो जाती है तो उस पर निर्भर लोगों को अच्छी-खासी राशि मिल जाएगी।
बीमा की अन्य योजनाओं के मुकाबले टर्म इंश्योरेंस काफी सस्ता पड़ता है क्योंकि यह
न्यूनतम कीमत (प्रीमियम) पर जीवन बीमा उपलब्ध कराता है। इसके अतिरिक्त, टर्म इंश्योरेंस उन
स्थितियों में भी काफी बेहतर साबित होता है जब बीमाधारक ने कई बड़े कर्ज (जैसे होम
लोन, कार लोन आदि) ले रखे
होते हैं।
लेकिन इतने सारे फायदों के बावजूद, टर्म इंश्योरेंस योजनाएं लोकप्रिय नहीं हैं और लोग खरीदने
से परहेज करते हैं क्योंकि बीमाधारक के बीमा अवधि के दौरान जीवित रहने की स्थिति
में इस योजना के अंत में कोई राशि नहीं मिलती। चूंकि बीमा अवधि के आखिर में इस
योजना में कुछ भी नहीं मिलता, ऐसे में लोगों को यह लगता है कि इस योजना के लिए चुकाया गया पूरा प्रीमियम
बेकार चला गया।
अब एक ऐसी स्थिति की कल्पना कीजिए जिसमें लोगों को भविष्य की घटनाओं के बारे
में पहले से ही पता रहे। अगर ऐसा हो और लोगों को भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं
के बारे में पहले से ही जानकारी रहे, तो लोगों का जीवन काफी आसान हो जाएगा और वे उस जानकारी का
इस्तेमाल करते हुए टर्म इंश्योरेंस की खरीदारी की योजना बना सकते हैं और उसी के
अनुरूप खरीदारी कर सकते हैं। ज्योतिष के क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इस
काल्पनिक स्थिति को ज्योतिष की मदद से वास्तविकता में बदला जा सकता है।
चन्द्रमा, सूर्य और अन्य ग्रहों का अध्ययन होने के नाते ज्योतिष शास्त्र किसी व्यक्ति के
व्यक्तित्व, चरित्र और व्यवहार पर इनके प्रभावों का आकलन करता है। इसके अलावा ज्योतिष
शास्त्र उस व्यक्ति के भविष्य से संबंधित विभिन्न घटनाओं की भविष्यवाणी भी करता
है। बेशक ज्योतिष शास्त्र के सटीक होने या न होने के बारे में एक लंबी बहस छेड़ी
जा सकती है, लेकिन हमारे समाज में ज्योतिष शास्त्र का अस्तित्व शताब्दियों से है और जाति,
धर्म, संप्रदाय से परे हर तरह के लोग अपने जीवन के
विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए और जीवन की विभिन्न समस्याओं को सुलझाने के लिए
ज्योतिष शास्त्र का सहारा लेते रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के मानने वाले कहते हैं
कि यह न केवल आकस्मिक व अप्रत्याशित घटनाओं के प्रभावों को कम करने में मदद करता
है बल्कि कई बार इन घटनाओं को टालने में भी सहायक सिद्ध होता है। इनके अनुसार ज्योतिष
शास्त्र वह राह दिखाता है कि भविष्य में क्या निहित है और अप्रत्याशित घटनाओं के
बारे में योजना बना कर कोई व्यक्ति किस तरह से बेहतर जीवन व्यतीत कर सकता है।
ज्योतिषियों का दावा है कि उनके ग्राहकों में से अधिकांश लोग जीवन से संबंधित
विभिन्न महत्वपूर्ण फैसले लेने से पहले ज्योतिष शास्त्र का सहारा लेते हैं। और तो
और, लोग बीमा योजनाओं की
खरीदारी में भी ज्योतिष की मदद लेने लगे हैं।
ज्योतिष शास्त्रियों का कहना है कि ज्योतिष की मदद से कोई व्यक्ति टर्म
इंश्योरेंस का अधिकतम फायदा उठा सकता है। लेकिन सवाल उठता है कि वह ऐसा किस तरह कर
सकता है? वित्तीय क्षेत्र के
ज्योतिषी सतीश गुप्ता, जो एस्ट्रो स्टॉक टिप्स डॉट इन नामक एक वेबसाइट भी चलाते हैं, कहते हैं, ज्योतिष के जरिए हमें जीवन
के सभी पहलुओं के बारे में सूचनाएं प्राप्त होती हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि
इसकी मदद से हमें जीवन के बुरे दौर (भविष्य में संभावित) के बारे में भी जानकारी
मिल जाती है।
कुछ और ज्योतिषियों का भी यही विचार है। वित्तीय क्षेत्र से संबंधित ज्योतिष
के जानकार जय गोविन्द शास्त्री कहते हैं, किसी भी व्यक्ति की कुन्डली को देख कर उसके जीवन के अच्छे व
बुरे सभी पहलुओं के बारे में भविष्यवाणी की जाती है। इन ज्योतिष शास्त्रियों का
कहना है कि जब ज्योतिष की मदद से किसी व्यक्ति के जीवन के बुरे दौर के बारे में
पता लग जाता है तो इसका इस्तेमाल उसके फायदे के लिए किया जा सकता है, वह व्यक्ति खास तौर पर उन
खराब वर्षों के लिए टर्म इंश्योरेंस खरीद सकता है। ज्योतिष शास्त्रियों का कहना है
कि ज्योतिष व बीमा के इस संयोग में बीमाधारकों के परिवारों के लिए काफी उपयोगी
साबित होने की संभावनाएं निहित होती हैं।
आम तौर पर लोग अपनी कुन्डली किसी ज्योतिषी को देकर अपनी जीवन संभाव्यता,
स्वास्थ्य, दुर्घटनाओं, विवाह, नौकरी, वित्तीय स्थिति आदि के बारे
में पूछते रहते हैं। किसी घर में किसी बच्चे का जन्म होने पर ज्योतिष शास्त्री
वहां जाता है और उस बच्चे के जन्म की तिथि, समय, जन्म का स्थान आदि की जानकारी हासिल करता है। इन जानकारियों
के आधार पर वह पेशेवर ज्योतिष शास्त्री उस परिवार के उस सदस्य के जीवन के सभी
पहलुओं के बारे में भविष्यवाणी व आकलन पेश करता है। उसकी कुन्डली बनाने के बाद
उसके आधार पर वह इस बात की संभावित रिपोर्ट बनाता है कि उस बच्चे का भाग्योदय कब
होगा, उसकी नौकरी आदि कब
लगेगी, उसका विवाह कब होगा
आदि।
लेकिन इस दिशा में भी चीजें तेजी से बदली हैं। ज्योतिष शास्त्रियों का एक वर्ग
ऐसा भी है जिसने भविष्य के आकलन में प्रबंधन रणनीतियों का इस्तेमाल करना भी शुरू
कर दिया है। अब ज्योतिष शास्त्री अपने ग्राहकों का विस्तृत लाइफ स्केच बनाने लगे
हैं ताकि आने वाले दिनों और सालों में उनके जीवन में होने वाली सभी महत्वपूर्ण
घटनाओं के बारे में सटीक तरीके से भविष्यवाणी की जा सके।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइन्सेज के सीईओ सतीश शर्मा कहते हैं,
किसी व्यक्ति के जीवन के
बारे में विस्तार से जानने के लिए ज्योतिष की मदद से स्वॉट (एसडब्ल्यूओटी)
एनालिसिस किया जाता है। स्वॉट एनालिसिस एक ऐसी विशिष्ट प्रक्रिया है जिसके जरिए
किसी व्यक्ति के जीवन में स्ट्रेंथ्स (एस), वीकनेस (डब्ल्यू), अपार्चुनिटीज (ओ) और थ्रेट्स (टी) का मूल्यांकन
किया जाता है। शर्मा बताते हैं कि स्वॉट एनालिसिस (यानि मजबूतियों, कमजोरियों, अवसरों और खतरों का
विश्लेषण) का लक्ष्य होता है उस व्यक्ति के जीवन से जुड़े सभी खतरों के बारे में
विस्तार से जानना। इसमें गंभीर बीमारियों, आकस्मिक दुर्घटनाओं सहित विभिन्न जोखिमों का विश्लेषण शामिल
होता है।
ज्योतिष शास्त्री इस बात पर जोर देते हैं कि यह रिपोर्ट सही और सटीक बातों तक
पहुंचने की कोशिश और घटनाओं के पूर्वानुमान का प्रयास होता है जो भविष्य में उस
परिवार को वित्तीय संकट में फंसने से बचाने में मदद करता है। शर्मा कहते हैं,
चूंकि इस विश्लेषण में उस
व्यक्ति के जीवन के विभिन्न चरणों में संभावित घटनाओं का विस्तार से वर्णन होता है,
ऐसे में व्यक्ति उन घटनाओं
के अनुरूप बीमा योजनाओं की खरीदारी कर सकता है। छोटी अवधि के लिए टर्म इंश्योरेंस
की खरीदारी करने में इस विश्लेषण का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस समय विभिन्न जीवन बीमा कंपनियां छोटी अवधि के लिए भी टर्म इंश्योरेंस प्लान
उपलब्ध करा रही हैं (पांच साल की अवधि के टर्म इंश्योरेंस प्लान भी बाजार में
उपलब्ध हैं), ऐसे में इन ज्योतिष शास्त्रियों का कहना है कि अस्थायी जरूरतों जैसे बचे हुए
घर कर्ज के बचे हुए हिस्से अदायगी, बच्चे की शिक्षा की फीस की अदायगी आदि को पूरा करने के लिए भी इन टर्म
इंश्योरेंस प्लान की खरीदारी की जा सकती है।
यदि इस छोटी अवधि के भीतर बीमाधारक की मृत्यु हो जाती है तो उपरोक्त जरूरतें
बीमा कंपनी की ओर से मिले धन से पूरी हो सकती हैं। शास्त्री भी इसी दिशा में सोचते
नजर आते हैं। वह कहते हैं, कोई व्यक्ति ज्योतिष के आधार पर अपने जीवन के बुरे दौर के बारे में मिली
जानकारी का इस्तेमाल करते हुए इस छोटी अवधि के लिए टर्म इंश्योरेंस की खरीदारी कर
सकता है ताकि उसकी आकस्मिक मौत के बाद उसके परिवार को दिक्कतों का दौर न देखना
पड़े।
(मनी मंत्र में प्रकाशित)
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