Monday, March 11, 2013

दाल में कुछ तो काला जरूर है

अपार्टमेंट की कीमत में पाइए फॉर्म हाउस। नोएडा में अपने कार्यालय आते-जाते इस तरह के आकर्षक विज्ञापनों पर अक्सर नजर पड़ जाती थी। यही नहीं, मेरे मेल बॉक्स में भी इस तरह के विज्ञापन वाले मेल आते रहते थे। इस तरह की परियोजनाओं के नाम भी ऐसे रखे जाते हैं कि बरबस आपके मन में हरी-भरी वादियों की याद ताजा हो उठे और आप उस परिवेश में रहने को लालायित हो जाएं। जरा इन नामों पर गौर फरमाएं- ग्रीन लैंड, ग्रीन ब्यूटी, नेचर लैंड आदि। ऐसे में जब एक सेल्स एक्जिक्यूटिव ने फोन कर इस तरह के फॉर्म हाउस विजिट करने का ऑफर दिया, तो मैं खुद को वहां जाने से रोक नहीं पाया।

सुविधाओं का जाल
तकरीबन 1500 बीघे में फैले उस परिसर के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा की बेहतरीन व्यवस्था के साथ आकर्षित करने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह काफी आगे तक चला। परिसर में प्रवेश के साथ ही सेल्स एक्जिक्यूटिव ने इसके साथ मौजूद सुविधाओं को दिखाना और गिनाना शुरू कर दिया। एक्जिक्यूटिव बोलना शुरू करता है- सबसे पहले बात करते हैं उन सुविधाओं की जो सम्मिलित तौर पर उपलब्ध हैं- क्लब हाउस, जॉगिंग ट्रैक, क्रिकेट ग्राउंड, स्वीमिंग पूल, पार्टी के लिए बड़ा लॉन, 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था, देखभाल के लिए कर्मचारी।

दिल्ली के बहुत पास
सुविधाओं का क्रम यहीं खत्म नहीं होता। हर फॉर्म हाउस के सामने 30-35 फीट चौड़ी सडक़, हर फॉर्म हाउस के सामने प्रकाश की बेहतरीन व्यवस्था के लिए सडक़ों के किनारे लगे स्ट्रीट लाइट, सडक़ों के किनारे हरे-भरे पेड़ पौधे भी आपको आकर्षित करने का पूरा इंतजाम करते हैं। अगर आपका घर दिल्ली में है तो वीकेंड पर महज एक से डेढ़ घंटे में आप अपने फॉर्म हाउस पहुंच सकते हैं। नोएडा एक्सप्रेस वे से भी यह अधिक दूरी पर नहीं है। आपको अपने दोस्तों के साथ कोई पार्टी करनी है तो आप यहां के क्लब का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपको बड़ी पार्टी करनी है तो क्रिकेट ग्राउंड का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको रखरखाव शुल्क के अलावा कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
एक्जिक्यूटिव ने बताया, हम खुद साल में तीन बार- 26 जनवरी, होली और 15 अगस्त को यहां पर बड़े इवेंट आर्गेनाइज करते हैं। पिछली बार यहां हनी सिंह को बुलाया था और उससे पहले वाले इवेंट में मीका सिंह ने प्रोग्राम दिया था। कितनी है कीमत सुविधाएं गिनाने का सिलसिला अभी और आगे बढ़ता अगर हमने कीमत का सवाल नहीं उठाया होता। जो फॉर्म हाउस हमें दिखाया गया उसकी कीमत थी 3900 रुपए प्रति वर्ग गज। बिक्री के लिए उपलब्ध सबसे छोटे फॉर्म हाउस का क्षेत्रफल था- 1000 वर्ग गज।
इसका मतलब यह कि एक हजार वर्ग गज वाले उस फॉर्म हाउस की न्यूनतम कीमत 39 लाख रुपए पड़ रही थी। उसने बताया कि यह फ्री होल्ड प्रॉपर्टी है और उसकी बाकायदा रजिस्ट्री होगी। इस परिसर में फॉर्म हाउस खरीदने के बाद हर साल 12 हजार रुपए प्रति एक हजार वर्ग गज बतौर रख-रखाव शुल्क देना होगा। साथ ही एक्जिक्यूटिव ने यह भी बता दिया कि चूंकि सर्किल रेट तकरीबन 12 लाख रुपए के आसपास है, ऐसे में इतनी अदायगी चैक के माध्यम से करनी होगी और बाकी भुगतान नकदी में करना होगा।
और तो और हमें आकर्षित करने के लिए उसने उच्चतम न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के बड़े न्यायाधीशों और वकीलों के नाम गिनाने शुरू कर दिए जिन्होंने वहां पर फॉर्म हाउस ले रखा है और अगर हम वहां अपने लिए एक फॉर्म हाउस खरीद लेते हैं तो हमें भी उन लोगों का पड़ोसी बनने का मौका मिल सकता है। उसने बताया कि इस जमीन पर पक्का निर्माण नहीं किया जा सकता, हालांकि पांच फीसदी हिस्से पर अस्थायी निर्माण जरूर किया जा सकता है। उस अस्थायी निर्माण की लागत दो लाख रुपए से लेकर 15-20 लाख रुपए तक हो सकती है। उसने यह आश्वासन भी दिया कि आवश्यकता पडऩे पर वह उन लोगों से बात करा देगा जो इस तरह के निर्माण का ठेका लेते हैं।

मालिकाने का सवाल
अब सवाल आया मालिकाने का। हमने पूछा, आपने यह जमीन किससे खरीदी? उसने बताया कि यह जमीन उसकी कंपनी ने वहां के किसानों से खरीदी है और उसका विकास कर उसकी कंपनी उस जमीन की बिक्री कर रही है।
यह वह पहला बड़ा झूठ था, जिस पर इन भू माफियाओं का पूरा खेल आधारित है। दरअसल नोएडा और उसके आसपास के इलाकों में यमुना नदी के किनारे की जमीन पर भू माफियाओं ने अनाधिकृत तरीके से कब्जा कर रखा है और झूठ बोल कर खरीदारों से इन फॉर्म हाउस की भारी कीमत वसूल रहे हैं।
बात को और आगे बढ़ाने से पहले आइए वहां की स्थितियों को समझते हैं। यमुना नदी को आबादी वाली जमीन से अलग करने के लिए यमुना नदी के किनारे पुश्ते बनाए गए हैं। पुश्ते के एक ओर आबादी वाली जमीन है तो दूसरी ओर है बाढ़ क्षेत्र। यह क्षेत्र सीधे-सीधे सिंचाई विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है जिस पर निर्माण कार्य किया ही नहीं जा सकता।
लेकिन स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे न केवल इस तरह की निर्माण गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है और पर्यावरण मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बल्कि इस जमीन की रजिस्ट्री भी कराई जा रही है।
सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस जमीन पर न तो निर्माण किया जा सकता है और न ही इसकी रजिस्ट्री कराई जा सकती है। यह आश्चर्यजनक है कि प्रशासन को यह सारा खेल न तो नजर आ रहा है और न ही यह इन माफियाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई कर रहा है।
दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन के एक अधिकारी कहते हैं, इस जमीन की बिक्री करना पूरी तरह अवैध है। लोगों को इस तरह की जमीन की खरीदारी से दूर रहना चाहिए। यह वाकई आश्चर्यजनक है कि आखिर कैसे इस तरह के फॉर्म हाउस की रजिस्ट्री हो रही है।
(मनी मंत्र में प्रकाशित)

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