हर निवेशक का केवल एक ही लक्ष्य होता
है- मुनाफा, चाहे वह शेयर बाजार (Stock Market) में निवेश करे या
फिर म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में। लेकिन दिक्कत यह है कि इन क्षेत्रों में किया गया हर निवेश
उस निवेशक की योजनाओं के अनुरूप काम करे, यह कतई
जरूरी नहीं होता। आपके द्वारा किया गया शोध चाहे कितना ही बेहतर क्यों न हो,
आपको मिली सूचना चाहे कितनी ही सटीक क्यों न हो, आपका दांव उल्टा भी पड़ सकता है। इसके पीछे कारण कुछ भी हो
सकता है- बाजार की खराब मनोदशा या गलत सूचना या नीतियों में अचानक से आया बदलाव
आदि। ऐसे में यह निहायत जरूरी है कि निवेशक अपने निवेश की हेजिंग करे।
क्या होती है हेजिंग
हेजिंग (Hedging) दरअसल किसी भी निवेश में
एक्सपोजर (Exposure) के जोखिम (Risk) को कम करने का एक साधन या उपाय है। यहां यह ध्यान देना
महत्वपूर्ण है कि पैसे बनाने या फिर मुनाफा बढ़ाने के लिए हेजिंग का इस्तेमाल नहीं
किया जाता, हेजिंग का प्रयोग परिस्थितियां
विपरीत होने की दशा में होने वाले किसी भी संभावित घाटे से अपने निवेश को बचाने के
लिए किया जाता है। एक अन्य बात जिसे ध्यान रखना जरूरी है, वह यह है कि हेजिंग का इस्तेमाल आपके संभावित मुनाफे को कम कर सकता है,
लेकिन साथ ही साथ यह आपको होने वाले संभावित घाटे को भी
कम कर देता है। इस लेख में हम म्यूचुअल फंड के निवेश में हेजिंग के विभिन्न तरीकों
के इस्तेमाल पर चर्चा करेंगे।
उचित एसेट एलोकेशन योजना
जहां तक म्यूचुअल फंड में निवेश का
सवाल है, इसमें की जाने वाली हेजिंग का एक लक्ष्य
होता है पोर्टफोलियो (Portfolio) के निर्माण के दौरान उत्पन्न होने वाले जोखिम को कम करना। अगर
हम तकनीकी तौर पर देखें तो हेजिंग के लिए जरूरी है दो ऐसे वित्तीय उत्पादों में
निवेश जिनके बीच नकारात्मक सहसंबंध (Negative Corelation) हो। इसका सीधा मतलब यह होता है कि किसी एक
परिस्थिति में यदि एक वित्तीय उत्पाद खराब प्रदर्शन कर रहा हो तो दूसरा निश्चित
तौर पर बेहतर प्रदर्शन करेगा। और यदि दूसरा खराब प्रदर्शन कर रहा हो तो पहला
निश्चित तौर अच्छा प्रदर्शन दिखाएगा। यानि किसी भी परिस्थिति में न तो दोनों एक
साथ ऊपर जाएंगे और न ही एक साथ नीचे जाएंगे।
लेकिन म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो की
हेजिंग की राह में सबसे पहला कदम होता है उचित एसेट एलोकेशन योजना बनाना। इसके लिए
जरूरी होता है कि निवेशक अपनी पूंजी को विभाजित कर अपने उद्देश्यों और अपनी जोखिम
प्रोफाइल के अनुरूप विभिन्न म्यूचुअल फंड योजनाओं में लगाए। इससे यह सुनिश्चित
होगा कि खराब से खराब परिस्थितियों में भी निवेशक को अधिक नुकसान नहीं सहना पड़ेगा
क्योंकि किसी भी निश्चित अवधि के दौरान विभिन्न म्यूचुअल फंड योजनाओं का प्रदर्शन
एक जैसा नहीं होता। आपके म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में शामिल सभी योजनाओं का
प्रदर्शन एक ही साथ न तो बेहतर होगा और न ही बदतर।
इंडेक्स फंड का चयन
लेकिन जहां तक म्यूचुअल फंड के
पोर्टफोलियो के लिए हेजिंग के उपायों के इस्तेमाल का सवाल है, उचित एसेट एलोकेशन योजना (Asset Allocation Scheme) बनाना ही एकमात्र उपाय नहीं है।
चूंकि किसी भी स्टॉक एक्सचेंज के इंडेक्स (Index) में विविध सेक्टर्स के विभिन्न
शेयर होते हैं, ऐसे में उस इंडेक्स पर आधारित
इंडेक्स फंड का एक्सपोजर विभिन्न सेक्टर्स में होगा। उदाहरण के तौर पर नेशनल स्टॉक
एक्सचेंज (Nation Stock Exchange) के सूचकांक निफ्टी (Nifty में 50 कंपनियों के शेयर शामिल हैं जो विभिन्न
क्षेत्रों- बैंकिंग (Banking), रियल्टी (Realty), तेल-गैस (Oil & Gas), फार्मा (Pharmaceuticals), धातु, आईटी, सीमेंट, एफएमसीजी (FMCG), टेलीकॉम (Telecom) आदि- से आते हैं।
ऐसे में निफ्टी सूचकांक पर आधारित किसी म्यूचुअल
फंड योजना का एक्सपोजर इन विभिन्न क्षेत्रों में होगा। इससे यह सुनिश्चित होता है
कि यदि किसी एक सेक्टर के शेयर खराब प्रदर्शन करते हैं तो दूसरे सेक्टर के शेयरों
के बेहतरीन प्रदर्शन से उस नुकसान की भरपाई हो जाती है। इसका मतलब यह कि म्यूचुअल
फंड में हेजिंग का एक तरीका है अपने एमएफ पोर्टफोलियो में इंडेक्स फंड के वेटेज को
बढ़ा देना। लेकिन यह केवल उसी निवेशक को करना चाहिए जिसके पोर्टफोलियो में इक्विटी
का अनुपात अधिक हो। इसके अलावा यह फैसला लेते समय अपने निवेश उद्देश्यों और जोखिम
उठा सकने की अपनी क्षमता पर भी उचित तरीके से विचार कर लेना चाहिए।
डिफेंसिव सेक्टर फंडों पर लगाएं दांव
जैसा कि सभी जानते हैं, हर सेक्टर का अपना आर्थिक और कारोबारी चक्र होता है और उस
सेक्टर का प्रदर्शन उसके ही अनुरूप होता है। इसके अलावा, कई सारे सेक्टर्स का प्रदर्शन भू-राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य से तय होता
है। ऐसी स्थिति में वह निवेशक असल में कुशल निवेशक माना जाता है जो उचित म्यूचुअल
फंड का चयन कर पाता है।
आम तौर पर अशांत परिस्थितियों में
डिफेंसिव सेक्टर्स (Defensive Sectors) जैसे फार्मास्युटिकल्स और एफएमसीजी आदि का प्रदर्शन अच्छा रहता
है। ऐसे में इन सेक्टर्स पर आधारित सेक्टोरल फंडों का इस्तेमाल बाजार की
परिस्थितियों को देखते हुए किया जा सकता है। अगर बाजार में तेजी का रुख दिख रहा है
और इसके बने रहने की उम्मीद है, ऐसे में निवेशक
अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में मोमेंटम वाले सेक्टर्स का एक्सपोजर बढ़ा सकता
है और डिफेंसिंव सेक्टर्स का एक्सपोजर घटा सकता है।
लेकिन बाजार में गिरावट की संभावनाओं
को देखते हुए कोई निवेशक अपनी रणनीति को बदलते हुए डिफेंसिव सेक्टर फंड को हेजिंग
के साधन के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि बाजार में गिरावट की
संभावनाएं बढ़ती नजर आ रही हैं तो निवेशक हेजिंग रणनीति के तौर पर अपने म्यूचुअल
फंड पोर्टफोलियो में फार्मा फंड (Pharma Fund) को जगह दे सकता है।
डेट एमएफ में कर सकते हैं निवेश
निवेशक द्वारा विभिन्न प्रकार के
म्यूचुअल फंड में एक्सपोजर उसकी आयु और जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करता है।
आम तौर पर ऐसा देखा गया है कि अधिक जोखिम ले सकने वाले निवेशक और युवा निवेशक डेट
म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश करने से कतराते हैं। लेकिन यह उचित निवेश रणनीति
नहीं है। ऐसे निवेशकों को अपने म्यूचुअल फंड निवेश के जोखिम की हेजिंग निश्चित तौर
पर करनी चाहिए। अगर किसी निवेशक ने इक्विटी-आधारित म्यूचुअल फंड में काफी अधिक अनुपात
में निवेश कर रखा है तो उसके लिए यह जरूरी है कि अपने इस निवेश के जोखिम की हेजिंग
के लिए डेट-आधारित म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश करे।
निवेशक को यह ध्यान देना चाहिए कि इन
म्यूचुअल फंड योजनाओं से हासिल होने वाले रिटर्न पर कर के मोर्चे पर भी तुलनात्मक
रूप में अधिक सहूलियत मिलती है। सबसे पहली बात यह है कि इन योजनाओं से होने वाले
लांग टर्म कैपिटल गेन्स पर कर लगाये जाते समय इंडेक्सेशन का फायदा मिलता है। दूसरे,
इनसे मिलने वाले लाभांश पर लगने वाला कर भी कम होता है।
इन दो वजहों से ये योजनाएं अपने निवेशकों को अधिक कर-पश्चात रिटर्न
(Post tax return) मुहैया कराती हैं।
जिन निवेशकों के म्यूचुअल फंड
पोर्टफोलियो में इक्विटी-आधारित म्यूचुअल फंड योजनाओं में अधिक एक्सपोजर है,
उन्हें हेजिंग के साधन के तौर पर गिल्ट एमएफ का चयन करना
चाहिए। गौरतलब है कि गिल्ट फंड (Gilt Fund) विविध प्रकार की मध्यम अवधि और लंबी अवधि की सरकारी
प्रतिभूतियों (Government Securities) में निवेश करते हैं।
(मनी मंत्र में प्रकाशित)
(मनी मंत्र में प्रकाशित)
