Monday, March 11, 2013

म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी घाटे से बचाती है हेजिंग रणनीति


हर निवेशक का केवल एक ही लक्ष्य होता है- मुनाफा, चाहे वह शेयर बाजार (Stock Market) में निवेश करे या फिर म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में। लेकिन दिक्कत यह है कि इन क्षेत्रों में किया गया हर निवेश उस निवेशक की योजनाओं के अनुरूप काम करे, यह कतई जरूरी नहीं होता। आपके द्वारा किया गया शोध चाहे कितना ही बेहतर क्यों न हो, आपको मिली सूचना चाहे कितनी ही सटीक क्यों न हो, आपका दांव उल्टा भी पड़ सकता है। इसके पीछे कारण कुछ भी हो सकता है- बाजार की खराब मनोदशा या गलत सूचना या नीतियों में अचानक से आया बदलाव आदि। ऐसे में यह निहायत जरूरी है कि निवेशक अपने निवेश की हेजिंग करे।

क्या होती है हेजिंग

हेजिंग (Hedging) दरअसल किसी भी निवेश में एक्सपोजर (Exposure) के जोखिम (Risk) को कम करने का एक साधन या उपाय है। यहां यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि पैसे बनाने या फिर मुनाफा बढ़ाने के लिए हेजिंग का इस्तेमाल नहीं किया जाता, हेजिंग का प्रयोग परिस्थितियां विपरीत होने की दशा में होने वाले किसी भी संभावित घाटे से अपने निवेश को बचाने के लिए किया जाता है। एक अन्य बात जिसे ध्यान रखना जरूरी है, वह यह है कि हेजिंग का इस्तेमाल आपके संभावित मुनाफे को कम कर सकता है, लेकिन साथ ही साथ यह आपको होने वाले संभावित घाटे को भी कम कर देता है। इस लेख में हम म्यूचुअल फंड के निवेश में हेजिंग के विभिन्न तरीकों के इस्तेमाल पर चर्चा करेंगे।



उचित एसेट एलोकेशन योजना

जहां तक म्यूचुअल फंड में निवेश का सवाल है, इसमें की जाने वाली हेजिंग का एक लक्ष्य होता है पोर्टफोलियो (Portfolio) के निर्माण के दौरान उत्पन्न होने वाले जोखिम को कम करना। अगर हम तकनीकी तौर पर देखें तो हेजिंग के लिए जरूरी है दो ऐसे वित्तीय उत्पादों में निवेश जिनके बीच नकारात्मक सहसंबंध (Negative Corelation) हो। इसका सीधा मतलब यह होता है कि किसी एक परिस्थिति में यदि एक वित्तीय उत्पाद खराब प्रदर्शन कर रहा हो तो दूसरा निश्चित तौर पर बेहतर प्रदर्शन करेगा। और यदि दूसरा खराब प्रदर्शन कर रहा हो तो पहला निश्चित तौर अच्छा प्रदर्शन दिखाएगा। यानि किसी भी परिस्थिति में न तो दोनों एक साथ ऊपर जाएंगे और न ही एक साथ नीचे जाएंगे।

लेकिन म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो की हेजिंग की राह में सबसे पहला कदम होता है उचित एसेट एलोकेशन योजना बनाना। इसके लिए जरूरी होता है कि निवेशक अपनी पूंजी को विभाजित कर अपने उद्देश्यों और अपनी जोखिम प्रोफाइल के अनुरूप विभिन्न म्यूचुअल फंड योजनाओं में लगाए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि खराब से खराब परिस्थितियों में भी निवेशक को अधिक नुकसान नहीं सहना पड़ेगा क्योंकि किसी भी निश्चित अवधि के दौरान विभिन्न म्यूचुअल फंड योजनाओं का प्रदर्शन एक जैसा नहीं होता। आपके म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में शामिल सभी योजनाओं का प्रदर्शन एक ही साथ न तो बेहतर होगा और न ही बदतर।

इंडेक्स फंड का चयन

लेकिन जहां तक म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो के लिए हेजिंग के उपायों के इस्तेमाल का सवाल है, उचित एसेट एलोकेशन योजना (Asset Allocation Scheme) बनाना ही एकमात्र उपाय नहीं है। चूंकि किसी भी स्टॉक एक्सचेंज के इंडेक्स (Index) में विविध सेक्टर्स के विभिन्न शेयर होते हैं, ऐसे में उस इंडेक्स पर आधारित इंडेक्स फंड का एक्सपोजर विभिन्न सेक्टर्स में होगा। उदाहरण के तौर पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (Nation Stock Exchange) के सूचकांक निफ्टी (Nifty में 50 कंपनियों के शेयर शामिल हैं जो विभिन्न क्षेत्रों- बैंकिंग (Banking), रियल्टी (Realty), तेल-गैस (Oil & Gas), फार्मा (Pharmaceuticals), धातु, आईटी, सीमेंट, एफएमसीजी (FMCG), टेलीकॉम (Telecom) आदि- से आते हैं। 

ऐसे में निफ्टी सूचकांक पर आधारित किसी म्यूचुअल फंड योजना का एक्सपोजर इन विभिन्न क्षेत्रों में होगा। इससे यह सुनिश्चित होता है कि यदि किसी एक सेक्टर के शेयर खराब प्रदर्शन करते हैं तो दूसरे सेक्टर के शेयरों के बेहतरीन प्रदर्शन से उस नुकसान की भरपाई हो जाती है। इसका मतलब यह कि म्यूचुअल फंड में हेजिंग का एक तरीका है अपने एमएफ पोर्टफोलियो में इंडेक्स फंड के वेटेज को बढ़ा देना। लेकिन यह केवल उसी निवेशक को करना चाहिए जिसके पोर्टफोलियो में इक्विटी का अनुपात अधिक हो। इसके अलावा यह फैसला लेते समय अपने निवेश उद्देश्यों और जोखिम उठा सकने की अपनी क्षमता पर भी उचित तरीके से विचार कर लेना चाहिए।

डिफेंसिव सेक्टर फंडों पर लगाएं दांव

जैसा कि सभी जानते हैं, हर सेक्टर का अपना आर्थिक और कारोबारी चक्र होता है और उस सेक्टर का प्रदर्शन उसके ही अनुरूप होता है। इसके अलावा, कई सारे सेक्टर्स का प्रदर्शन भू-राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य से तय होता है। ऐसी स्थिति में वह निवेशक असल में कुशल निवेशक माना जाता है जो उचित म्यूचुअल फंड का चयन कर पाता है।

आम तौर पर अशांत परिस्थितियों में डिफेंसिव सेक्टर्स (Defensive Sectors) जैसे फार्मास्युटिकल्स और एफएमसीजी आदि का प्रदर्शन अच्छा रहता है। ऐसे में इन सेक्टर्स पर आधारित सेक्टोरल फंडों का इस्तेमाल बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए किया जा सकता है। अगर बाजार में तेजी का रुख दिख रहा है और इसके बने रहने की उम्मीद है, ऐसे में निवेशक अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में मोमेंटम वाले सेक्टर्स का एक्सपोजर बढ़ा सकता है और डिफेंसिंव सेक्टर्स का एक्सपोजर घटा सकता है।

लेकिन बाजार में गिरावट की संभावनाओं को देखते हुए कोई निवेशक अपनी रणनीति को बदलते हुए डिफेंसिव सेक्टर फंड को हेजिंग के साधन के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि बाजार में गिरावट की संभावनाएं बढ़ती नजर आ रही हैं तो निवेशक हेजिंग रणनीति के तौर पर अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में फार्मा फंड (Pharma Fund) को जगह दे सकता है।

डेट एमएफ में कर सकते हैं निवेश

निवेशक द्वारा विभिन्न प्रकार के म्यूचुअल फंड में एक्सपोजर उसकी आयु और जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करता है। आम तौर पर ऐसा देखा गया है कि अधिक जोखिम ले सकने वाले निवेशक और युवा निवेशक डेट म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश करने से कतराते हैं। लेकिन यह उचित निवेश रणनीति नहीं है। ऐसे निवेशकों को अपने म्यूचुअल फंड निवेश के जोखिम की हेजिंग निश्चित तौर पर करनी चाहिए। अगर किसी निवेशक ने इक्विटी-आधारित म्यूचुअल फंड में काफी अधिक अनुपात में निवेश कर रखा है तो उसके लिए यह जरूरी है कि अपने इस निवेश के जोखिम की हेजिंग के लिए डेट-आधारित म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश करे।

निवेशक को यह ध्यान देना चाहिए कि इन म्यूचुअल फंड योजनाओं से हासिल होने वाले रिटर्न पर कर के मोर्चे पर भी तुलनात्मक रूप में अधिक सहूलियत मिलती है। सबसे पहली बात यह है कि इन योजनाओं से होने वाले लांग टर्म कैपिटल गेन्स पर कर लगाये जाते समय इंडेक्सेशन का फायदा मिलता है। दूसरे, इनसे मिलने वाले लाभांश पर लगने वाला कर भी कम होता है। इन दो वजहों से ये योजनाएं अपने निवेशकों को अधिक कर-पश्चात रिटर्न (Post tax return) मुहैया कराती हैं।

जिन निवेशकों के म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में इक्विटी-आधारित म्यूचुअल फंड योजनाओं में अधिक एक्सपोजर है, उन्हें हेजिंग के साधन के तौर पर गिल्ट एमएफ का चयन करना चाहिए। गौरतलब है कि गिल्ट फंड (Gilt Fund) विविध प्रकार की मध्यम अवधि और लंबी अवधि की सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में निवेश करते हैं।

(मनी मंत्र में प्रकाशित)

क्या है नफा, क्या है नुकसान



आयकर अधिनियम 1961 में एक नई धारा 80सीसीजी जोड़ते हुए निवेशकों को राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम (आरजीईएसएस) के रूप में एक नई कर बचत योजना उपलब्ध कराई गई है। जानकारों का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2012-13 (यानि आकलन वर्ष 2013-14) से लागू होने वाली यह योजना घरेलू पूंजी बाजार में छोटे निवेशकों की बचत के प्रवाह को बढ़ाने के लक्ष्य के साथ पेश की गई है। आरजीईएसएस के प्रावधानों के मुताबिक केवल वे निवेशक ही इसके तहत कर बचत कर सकते हैं जिनकी सालाना आमदनी 10 लाख रुपए से कम है। इस योजना के तहत कर बचत के लिए अधिकतम निवेश की सीमा 50 हजार रुपए है जिस पर 50 फीसदी की कटौती उपलब्ध होगी। आइए एक-एक कर इसके प्रावधानों के बारे में चर्चा करते हैं।

नए रिटेल निवेशकों के लिए

जानकारों का कहना है कि नए रिटेल निवेशकों को सीधे तौर पर इक्विटी निवेश की ओर मोडऩे के लिहाज से यह योजना बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। यह योजना खास तौर पर उन नए रिटेल निवेशकों के लिए है जो पहली बार शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं। सवाल यह है कि यहां नया रिटेल निवेशक किसे माना जाएगा? प्रावधानों के तहत, वह भारतीय निवासी (हिन्दू अविभाजित परिवार और अनिवासी भारतीय को अनुमति नहीं है) नया रिटेल निवेशक माना जाएगा जिसने पहले कोई डीमैट खाता न खोला हो और न ही इक्विटी या डेरिवेटिव सेगमेंट में निवेश किया हो। हालांकि यदि किसी के पास डीमैट खाता हो, लेकिन उसने कभी इन सेगमेंट में काम न किया हो, वह भी इसके लिए योग्य माना जाएगा।

न्यूनतम जोखिम की स्थिति

इस योजना के तहत जिन प्रतिभूतियों में निवेश की अनुमति दी गई है, उनमें शामिल हैं- सीएनएक्स 100 और बीएसई 100 के शेयर, महारत्न, नवरत्न और मिनी रत्न कंपनियों के शेयर, इन सभी के एफपीओ (फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर), चुनिंदा पीएसयू (पिछले लगातार तीन सालों से जिनका टर्नओवर 4000 करोड़ रुपए से अधिक हो) के आईपीओ, आरजीईएसएस के लिए योग्य माने गए ईटीएफ, एमएफ योजनाएं और न्यू फंड ऑफर (एनएफओ)। योजना के तहत निवेश योग्य प्रतिभूतियों की सूची जिस तरह से सीमित रखी गई है, इसका मतलब यह है कि नए रिटेल निवेशकों को खास तौर पर बड़ी कंपनियों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया है। जाहिर है, इन कंपनियों में निवेश की स्थिति में नए निवेशकों का जोखिम अपेक्षाकृत कम होगा।

लंबी अवधि के निवेश को प्रोत्साहन

योजना के तहत तीन साल की लॉक-इन अवधि का प्रावधान है। इसके जरिए एक ओर जहां जोखिम में कमी आएगी, वहीं लंबी अवधि के निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इन तीन सालों में से पहला साल फिक्स्ड लॉक-इन पीरियड है जिसके दौरान निवेशक इन प्रतिभूतियों को न तो गिरवी रख सकता है और न ही बेच सकता है। इसके बाद के दो सालों को फ्लेक्सिबल लॉक-इन अवधि कहा गया है, जिसके दौरान इनको बेचा भी जा सकता है और गिरवी भी रखा जा सकता है। हालांकि ऐसा करते हुए इस अवधि के प्रत्येक साल में 270 दिनों तक उसे निवेश की मूल राशि को बरकरार रखना होगा। इन प्रतिबंधों की वजह से रिटेल निवेशक को लंबी अवधि के निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

प्रतिभूतियों की खरीद

लेकिन इन प्रतिभूतियों को रखने के लिए निवेशक को किसी भी डीपी के साथ एक डीमैट खाता खोलना होगा। इसके लिए इन्हें केवाईसी मानकों का पालन करना होगा (जिसमें पैन कार्ड, पहचान पत्र और आवास प्रमाण पत्र दिखाना शामिल है)। इसके अलावा, इस डीमैट खाते को आरजीईएसएस के लिए नामित करना होगा। यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि इस खाते में अन्य इक्विटी शेयर, डिबेंचर, बांड और एमएफ यूनिट भी रखे जा सकते हैं। प्रावधानों के तहत निवेशक उस वित्तीय वर्ष में एक बार में या कई बार में इन प्रतिभूतियों में निवेश कर सकता है, जिस वर्ष के लिए टैक्स डिडक्शन का दावा करना है।

अधिकतम सीमा का उपयोग

जहां तक योजना के तहत निवेश की अधिकतम सीमा का सवाल है, निवेशक के लिए यह जानना जरूरी है कि इन प्रतिभूतियों की खरीद के लिए दिए गए ब्रोकरेज, एसटीटी, स्टैंप शुल्क, सेवा कर और अन्य करों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। खरीद के साथ ही स्वत: ये प्रतिभूतियां लॉक-इन के तहत आ जाएंगी। हालांकि, यदि कोई निवेशक यह नहीं चाहता कि उसके द्वारा खरीदी गई चुनिंदा प्रतिभूतियों को आरजीईएसएस के तहत न माना जाए तो उनके क्रेडिट होने के एक महीने के भीतर डीपी को आवेदन करके उसे ऐसा करने से मना किया जा सकता है।

कर बचत का प्रावधान

आरजीईएसएस के तहत कर लाभ लेने के लिए निवेशक इस योजना के तहत अधिकतम 50 हजार रुपए का निवेश कर सकता है। यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि यह निवेश आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत दी गई एक लाख की सीमा के अतिरिक्त होगा। इसका मतलब यह हुआ कि इस प्रावधान की वजह से निवेशक को कर बचत के लिए उपलब्ध राशि की सीमा बढ़ जाती है, हालांकि महज एक साल के लिए।

योजना के तहत निवेश की गई राशि पर 50 फीसदी का टैक्स डिडक्शन उपलब्ध होगा। उदाहरण के लिए यदि कोई निवेशक इस योजना में 50 हजार रुपए लगाता है तो उसकी कर-योग्य आमदनी में से 25 हजार रुपए घटा दिए जाएंगे। लेकिन यदि कोई निवेशक इस योजना के तहत महज 30 हजार रुपए निवेश करता है तो ऐसी स्थिति में उसकी कर-योग्य आमदनी से 15 हजार रुपए काटे जाएंगे। भले ही कोई निवेशक इस योजना के तहत 50 हजार रुपए से अधिक का निवेश करे, कर-बचत उसे केवल 50 हजार रुपए तक के निवेश पर ही मिलेगा। इसके अलावा यह जानना भी जरूरी है कि इस निवेश को दो सालों में बांट कर इस योजना के तहत कर बचत का लाभ नहीं लिया जा सकता।

योजना की दिक्कतें

हालांकि इस योजना के क्रियान्वयन से संबंधित कुछ दिक्कतें भी दिख रही हैं। जानकारों के अनुसार, केवाईसी मानकों का पालन करते हुए डीमैट खाता खोलना एक दुष्कर कार्य साबित हो सकता है। इसके अलावा, निवेशकों को डीमैट खाते के लिए सालाना 500 से एक हजार रुपए मेनटेनेंस शुल्क देने होंगे। जानकार बताते हैं कि यदि यह मेनटेनेंस शुल्क वसूला गया तो रिटेल निवेशक इस योजना में रुचि नहीं लेंगे।

योजना से संबंधित कई और दिक्कतें भी हैं। फंड्स इंडिया के निदेशक श्रीकांत मीनाक्षी कहते हैं, ईटीएफ सहित चुनिंदा म्यूचुअल फंड योजनाओं को आरजीईएसएस के दायरे के तहत शामिल किया जाना निश्चित तौर पर अच्छा कदम है। लेकिन इसमें कई प्रतिबंध हैं जो इसके लाभों को सीमित करते नजर आते हैं- यह पहली बार निवेश करने वाले लोगों के लिए ही है, इस पर होने वाला अधिकतम टैक्स लाभ 5000 रुपए होगा और यह केवल उन लोगों के लिए है जिनकी सालाना आमदनी दस लाख रुपए से कम है। इसकी एक और दिक्कत यह है कि इस योजना के तहत टैक्स सेविंग का लाभ निवेशक केवल एक बार ले सकता है। प्रावधान के अनुसार अगर इस धारा के तहत किसी आकलन वर्ष में किसी भी राशि पर टैक्स डिडक्शन मिल गया तो उसके बाद के किसी भी आकलन वर्ष में इस धारा के तहत डिडक्शन नहीं मिलेगा। मीनाक्षी कहते हैं, आरजीईएसएस के बारे में हम बहुत अधिक उत्साहित नहीं हैं क्योंकि यह जीवन में केवल एक बार उपलब्ध है और पहली बार निवेश करने वालों को कुछ सीमित शेयरों और फंडों में निवेश करने की इजाजत देता है।

(मनी मंत्र में प्रकाशित)

ज्योतिष की मदद से बीमा की खरीदारी

कोई भी व्यक्ति अपना भविष्य नहीं जानता। ऐसे में भविष्य में अचानक घटित होने वाली दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के परिणामों से सुरक्षा के लिए वह टर्म इंश्योरेंस की खरीद करता है। चूंकि टर्म इंश्योरेंस जीवन के जोखिम के विरुद्ध एक सुरक्षा योजना है, ऐसे में प्रीमियम कही जाने वाली छोटी सी राशि एक नियमित समय पर चुकता करते रहने से वह व्यक्ति न केवल मानसिक शांति खरीद लेता है, बल्कि वह इस बात की गारंटी भी हासिल कर लेता है कि यदि भविष्य में उसके साथ कोई अवांछित घटना हो जाती है तो उस पर निर्भर लोगों को अच्छी-खासी राशि मिल जाएगी। बीमा की अन्य योजनाओं के मुकाबले टर्म इंश्योरेंस काफी सस्ता पड़ता है क्योंकि यह न्यूनतम कीमत (प्रीमियम) पर जीवन बीमा उपलब्ध कराता है। इसके अतिरिक्त, टर्म इंश्योरेंस उन स्थितियों में भी काफी बेहतर साबित होता है जब बीमाधारक ने कई बड़े कर्ज (जैसे होम लोन, कार लोन आदि) ले रखे होते हैं।

लेकिन इतने सारे फायदों के बावजूद, टर्म इंश्योरेंस योजनाएं लोकप्रिय नहीं हैं और लोग खरीदने से परहेज करते हैं क्योंकि बीमाधारक के बीमा अवधि के दौरान जीवित रहने की स्थिति में इस योजना के अंत में कोई राशि नहीं मिलती। चूंकि बीमा अवधि के आखिर में इस योजना में कुछ भी नहीं मिलता, ऐसे में लोगों को यह लगता है कि इस योजना के लिए चुकाया गया पूरा प्रीमियम बेकार चला गया।

अब एक ऐसी स्थिति की कल्पना कीजिए जिसमें लोगों को भविष्य की घटनाओं के बारे में पहले से ही पता रहे। अगर ऐसा हो और लोगों को भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं के बारे में पहले से ही जानकारी रहे, तो लोगों का जीवन काफी आसान हो जाएगा और वे उस जानकारी का इस्तेमाल करते हुए टर्म इंश्योरेंस की खरीदारी की योजना बना सकते हैं और उसी के अनुरूप खरीदारी कर सकते हैं। ज्योतिष के क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इस काल्पनिक स्थिति को ज्योतिष की मदद से वास्तविकता में बदला जा सकता है।

चन्द्रमा, सूर्य और अन्य ग्रहों का अध्ययन होने के नाते ज्योतिष शास्त्र किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व, चरित्र और व्यवहार पर इनके प्रभावों का आकलन करता है। इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र उस व्यक्ति के भविष्य से संबंधित विभिन्न घटनाओं की भविष्यवाणी भी करता है। बेशक ज्योतिष शास्त्र के सटीक होने या न होने के बारे में एक लंबी बहस छेड़ी जा सकती है, लेकिन हमारे समाज में ज्योतिष शास्त्र का अस्तित्व शताब्दियों से है और जाति, धर्म, संप्रदाय से परे हर तरह के लोग अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए और जीवन की विभिन्न समस्याओं को सुलझाने के लिए ज्योतिष शास्त्र का सहारा लेते रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के मानने वाले कहते हैं कि यह न केवल आकस्मिक व अप्रत्याशित घटनाओं के प्रभावों को कम करने में मदद करता है बल्कि कई बार इन घटनाओं को टालने में भी सहायक सिद्ध होता है। इनके अनुसार ज्योतिष शास्त्र वह राह दिखाता है कि भविष्य में क्या निहित है और अप्रत्याशित घटनाओं के बारे में योजना बना कर कोई व्यक्ति किस तरह से बेहतर जीवन व्यतीत कर सकता है। ज्योतिषियों का दावा है कि उनके ग्राहकों में से अधिकांश लोग जीवन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण फैसले लेने से पहले ज्योतिष शास्त्र का सहारा लेते हैं। और तो और, लोग बीमा योजनाओं की खरीदारी में भी ज्योतिष की मदद लेने लगे हैं।

ज्योतिष शास्त्रियों का कहना है कि ज्योतिष की मदद से कोई व्यक्ति टर्म इंश्योरेंस का अधिकतम फायदा उठा सकता है। लेकिन सवाल उठता है कि वह ऐसा किस तरह कर सकता है? वित्तीय क्षेत्र के ज्योतिषी सतीश गुप्ता, जो एस्ट्रो स्टॉक टिप्स डॉट इन नामक एक वेबसाइट भी चलाते हैं, कहते हैं, ज्योतिष के जरिए हमें जीवन के सभी पहलुओं के बारे में सूचनाएं प्राप्त होती हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि इसकी मदद से हमें जीवन के बुरे दौर (भविष्य में संभावित) के बारे में भी जानकारी मिल जाती है।

कुछ और ज्योतिषियों का भी यही विचार है। वित्तीय क्षेत्र से संबंधित ज्योतिष के जानकार जय गोविन्द शास्त्री कहते हैं, किसी भी व्यक्ति की कुन्डली को देख कर उसके जीवन के अच्छे व बुरे सभी पहलुओं के बारे में भविष्यवाणी की जाती है। इन ज्योतिष शास्त्रियों का कहना है कि जब ज्योतिष की मदद से किसी व्यक्ति के जीवन के बुरे दौर के बारे में पता लग जाता है तो इसका इस्तेमाल उसके फायदे के लिए किया जा सकता है, वह व्यक्ति खास तौर पर उन खराब वर्षों के लिए टर्म इंश्योरेंस खरीद सकता है। ज्योतिष शास्त्रियों का कहना है कि ज्योतिष व बीमा के इस संयोग में बीमाधारकों के परिवारों के लिए काफी उपयोगी साबित होने की संभावनाएं निहित होती हैं।

आम तौर पर लोग अपनी कुन्डली किसी ज्योतिषी को देकर अपनी जीवन संभाव्यता, स्वास्थ्य, दुर्घटनाओं, विवाह, नौकरी, वित्तीय स्थिति आदि के बारे में पूछते रहते हैं। किसी घर में किसी बच्चे का जन्म होने पर ज्योतिष शास्त्री वहां जाता है और उस बच्चे के जन्म की तिथि, समय, जन्म का स्थान आदि की जानकारी हासिल करता है। इन जानकारियों के आधार पर वह पेशेवर ज्योतिष शास्त्री उस परिवार के उस सदस्य के जीवन के सभी पहलुओं के बारे में भविष्यवाणी व आकलन पेश करता है। उसकी कुन्डली बनाने के बाद उसके आधार पर वह इस बात की संभावित रिपोर्ट बनाता है कि उस बच्चे का भाग्योदय कब होगा, उसकी नौकरी आदि कब लगेगी, उसका विवाह कब होगा आदि।

लेकिन इस दिशा में भी चीजें तेजी से बदली हैं। ज्योतिष शास्त्रियों का एक वर्ग ऐसा भी है जिसने भविष्य के आकलन में प्रबंधन रणनीतियों का इस्तेमाल करना भी शुरू कर दिया है। अब ज्योतिष शास्त्री अपने ग्राहकों का विस्तृत लाइफ स्केच बनाने लगे हैं ताकि आने वाले दिनों और सालों में उनके जीवन में होने वाली सभी महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में सटीक तरीके से भविष्यवाणी की जा सके।

इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइन्सेज के सीईओ सतीश शर्मा कहते हैं, किसी व्यक्ति के जीवन के बारे में विस्तार से जानने के लिए ज्योतिष की मदद से स्वॉट (एसडब्ल्यूओटी) एनालिसिस किया जाता है। स्वॉट एनालिसिस एक ऐसी विशिष्ट प्रक्रिया है जिसके जरिए किसी व्यक्ति के जीवन में स्ट्रेंथ्स (एस), वीकनेस (डब्ल्यू), अपार्चुनिटीज (ओ) और थ्रेट्स (टी) का मूल्यांकन किया जाता है। शर्मा बताते हैं कि स्वॉट एनालिसिस (यानि मजबूतियों, कमजोरियों, अवसरों और खतरों का विश्लेषण) का लक्ष्य होता है उस व्यक्ति के जीवन से जुड़े सभी खतरों के बारे में विस्तार से जानना। इसमें गंभीर बीमारियों, आकस्मिक दुर्घटनाओं सहित विभिन्न जोखिमों का विश्लेषण शामिल होता है।

ज्योतिष शास्त्री इस बात पर जोर देते हैं कि यह रिपोर्ट सही और सटीक बातों तक पहुंचने की कोशिश और घटनाओं के पूर्वानुमान का प्रयास होता है जो भविष्य में उस परिवार को वित्तीय संकट में फंसने से बचाने में मदद करता है। शर्मा कहते हैं, चूंकि इस विश्लेषण में उस व्यक्ति के जीवन के विभिन्न चरणों में संभावित घटनाओं का विस्तार से वर्णन होता है, ऐसे में व्यक्ति उन घटनाओं के अनुरूप बीमा योजनाओं की खरीदारी कर सकता है। छोटी अवधि के लिए टर्म इंश्योरेंस की खरीदारी करने में इस विश्लेषण का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस समय विभिन्न जीवन बीमा कंपनियां छोटी अवधि के लिए भी टर्म इंश्योरेंस प्लान उपलब्ध करा रही हैं (पांच साल की अवधि के टर्म इंश्योरेंस प्लान भी बाजार में उपलब्ध हैं), ऐसे में इन ज्योतिष शास्त्रियों का कहना है कि अस्थायी जरूरतों जैसे बचे हुए घर कर्ज के बचे हुए हिस्से अदायगी, बच्चे की शिक्षा की फीस की अदायगी आदि को पूरा करने के लिए भी इन टर्म इंश्योरेंस प्लान की खरीदारी की जा सकती है।

यदि इस छोटी अवधि के भीतर बीमाधारक की मृत्यु हो जाती है तो उपरोक्त जरूरतें बीमा कंपनी की ओर से मिले धन से पूरी हो सकती हैं। शास्त्री भी इसी दिशा में सोचते नजर आते हैं। वह कहते हैं, कोई व्यक्ति ज्योतिष के आधार पर अपने जीवन के बुरे दौर के बारे में मिली जानकारी का इस्तेमाल करते हुए इस छोटी अवधि के लिए टर्म इंश्योरेंस की खरीदारी कर सकता है ताकि उसकी आकस्मिक मौत के बाद उसके परिवार को दिक्कतों का दौर न देखना पड़े।
(मनी मंत्र में प्रकाशित)

दाल में कुछ तो काला जरूर है

अपार्टमेंट की कीमत में पाइए फॉर्म हाउस। नोएडा में अपने कार्यालय आते-जाते इस तरह के आकर्षक विज्ञापनों पर अक्सर नजर पड़ जाती थी। यही नहीं, मेरे मेल बॉक्स में भी इस तरह के विज्ञापन वाले मेल आते रहते थे। इस तरह की परियोजनाओं के नाम भी ऐसे रखे जाते हैं कि बरबस आपके मन में हरी-भरी वादियों की याद ताजा हो उठे और आप उस परिवेश में रहने को लालायित हो जाएं। जरा इन नामों पर गौर फरमाएं- ग्रीन लैंड, ग्रीन ब्यूटी, नेचर लैंड आदि। ऐसे में जब एक सेल्स एक्जिक्यूटिव ने फोन कर इस तरह के फॉर्म हाउस विजिट करने का ऑफर दिया, तो मैं खुद को वहां जाने से रोक नहीं पाया।

सुविधाओं का जाल
तकरीबन 1500 बीघे में फैले उस परिसर के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा की बेहतरीन व्यवस्था के साथ आकर्षित करने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह काफी आगे तक चला। परिसर में प्रवेश के साथ ही सेल्स एक्जिक्यूटिव ने इसके साथ मौजूद सुविधाओं को दिखाना और गिनाना शुरू कर दिया। एक्जिक्यूटिव बोलना शुरू करता है- सबसे पहले बात करते हैं उन सुविधाओं की जो सम्मिलित तौर पर उपलब्ध हैं- क्लब हाउस, जॉगिंग ट्रैक, क्रिकेट ग्राउंड, स्वीमिंग पूल, पार्टी के लिए बड़ा लॉन, 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था, देखभाल के लिए कर्मचारी।

दिल्ली के बहुत पास
सुविधाओं का क्रम यहीं खत्म नहीं होता। हर फॉर्म हाउस के सामने 30-35 फीट चौड़ी सडक़, हर फॉर्म हाउस के सामने प्रकाश की बेहतरीन व्यवस्था के लिए सडक़ों के किनारे लगे स्ट्रीट लाइट, सडक़ों के किनारे हरे-भरे पेड़ पौधे भी आपको आकर्षित करने का पूरा इंतजाम करते हैं। अगर आपका घर दिल्ली में है तो वीकेंड पर महज एक से डेढ़ घंटे में आप अपने फॉर्म हाउस पहुंच सकते हैं। नोएडा एक्सप्रेस वे से भी यह अधिक दूरी पर नहीं है। आपको अपने दोस्तों के साथ कोई पार्टी करनी है तो आप यहां के क्लब का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपको बड़ी पार्टी करनी है तो क्रिकेट ग्राउंड का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको रखरखाव शुल्क के अलावा कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
एक्जिक्यूटिव ने बताया, हम खुद साल में तीन बार- 26 जनवरी, होली और 15 अगस्त को यहां पर बड़े इवेंट आर्गेनाइज करते हैं। पिछली बार यहां हनी सिंह को बुलाया था और उससे पहले वाले इवेंट में मीका सिंह ने प्रोग्राम दिया था। कितनी है कीमत सुविधाएं गिनाने का सिलसिला अभी और आगे बढ़ता अगर हमने कीमत का सवाल नहीं उठाया होता। जो फॉर्म हाउस हमें दिखाया गया उसकी कीमत थी 3900 रुपए प्रति वर्ग गज। बिक्री के लिए उपलब्ध सबसे छोटे फॉर्म हाउस का क्षेत्रफल था- 1000 वर्ग गज।
इसका मतलब यह कि एक हजार वर्ग गज वाले उस फॉर्म हाउस की न्यूनतम कीमत 39 लाख रुपए पड़ रही थी। उसने बताया कि यह फ्री होल्ड प्रॉपर्टी है और उसकी बाकायदा रजिस्ट्री होगी। इस परिसर में फॉर्म हाउस खरीदने के बाद हर साल 12 हजार रुपए प्रति एक हजार वर्ग गज बतौर रख-रखाव शुल्क देना होगा। साथ ही एक्जिक्यूटिव ने यह भी बता दिया कि चूंकि सर्किल रेट तकरीबन 12 लाख रुपए के आसपास है, ऐसे में इतनी अदायगी चैक के माध्यम से करनी होगी और बाकी भुगतान नकदी में करना होगा।
और तो और हमें आकर्षित करने के लिए उसने उच्चतम न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के बड़े न्यायाधीशों और वकीलों के नाम गिनाने शुरू कर दिए जिन्होंने वहां पर फॉर्म हाउस ले रखा है और अगर हम वहां अपने लिए एक फॉर्म हाउस खरीद लेते हैं तो हमें भी उन लोगों का पड़ोसी बनने का मौका मिल सकता है। उसने बताया कि इस जमीन पर पक्का निर्माण नहीं किया जा सकता, हालांकि पांच फीसदी हिस्से पर अस्थायी निर्माण जरूर किया जा सकता है। उस अस्थायी निर्माण की लागत दो लाख रुपए से लेकर 15-20 लाख रुपए तक हो सकती है। उसने यह आश्वासन भी दिया कि आवश्यकता पडऩे पर वह उन लोगों से बात करा देगा जो इस तरह के निर्माण का ठेका लेते हैं।

मालिकाने का सवाल
अब सवाल आया मालिकाने का। हमने पूछा, आपने यह जमीन किससे खरीदी? उसने बताया कि यह जमीन उसकी कंपनी ने वहां के किसानों से खरीदी है और उसका विकास कर उसकी कंपनी उस जमीन की बिक्री कर रही है।
यह वह पहला बड़ा झूठ था, जिस पर इन भू माफियाओं का पूरा खेल आधारित है। दरअसल नोएडा और उसके आसपास के इलाकों में यमुना नदी के किनारे की जमीन पर भू माफियाओं ने अनाधिकृत तरीके से कब्जा कर रखा है और झूठ बोल कर खरीदारों से इन फॉर्म हाउस की भारी कीमत वसूल रहे हैं।
बात को और आगे बढ़ाने से पहले आइए वहां की स्थितियों को समझते हैं। यमुना नदी को आबादी वाली जमीन से अलग करने के लिए यमुना नदी के किनारे पुश्ते बनाए गए हैं। पुश्ते के एक ओर आबादी वाली जमीन है तो दूसरी ओर है बाढ़ क्षेत्र। यह क्षेत्र सीधे-सीधे सिंचाई विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है जिस पर निर्माण कार्य किया ही नहीं जा सकता।
लेकिन स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे न केवल इस तरह की निर्माण गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है और पर्यावरण मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बल्कि इस जमीन की रजिस्ट्री भी कराई जा रही है।
सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस जमीन पर न तो निर्माण किया जा सकता है और न ही इसकी रजिस्ट्री कराई जा सकती है। यह आश्चर्यजनक है कि प्रशासन को यह सारा खेल न तो नजर आ रहा है और न ही यह इन माफियाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई कर रहा है।
दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन के एक अधिकारी कहते हैं, इस जमीन की बिक्री करना पूरी तरह अवैध है। लोगों को इस तरह की जमीन की खरीदारी से दूर रहना चाहिए। यह वाकई आश्चर्यजनक है कि आखिर कैसे इस तरह के फॉर्म हाउस की रजिस्ट्री हो रही है।
(मनी मंत्र में प्रकाशित)