Friday, October 18, 2013

शट शट शटडाउन



सत्रह सालों के बाद एक बार फिर अमेरिका में शटडाउन (Shutdown) घोषित कर दिया गया है। इसकी वजह से 21 लाख संघीय कर्मचारियों में से तकरीबन आठ लाख को बिना वेतन के अवकाश पर भेजा जा रहा है। हालांकि, अमेरिकी मिलिटरी और सुरक्षा संबंधी अन्य एजेंसियां काम करना जारी रखेंगी, लेकिन नासा, इनवायरमेंट प्रोटेक्शन एजेंसी (Environment Protection Agency) आदि को कामकाज बंद करना होगा। पिछली बार 1995-96 में यह स्थिति आई थी, जब अमेरिका में 28 दिनों तक शटडाउन रहा था। इसके बाद 2011 में भी हालात तकरीबन शटडाउन तक पहुंच गए थे। 

आइए सबसे पहले समझते हैं कि शटडाउन क्या है और ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हो गई है? शटडाउन एक ऐसी राजनीतिक स्थिति है जिसमें सरकार आवश्यक सेवाओं को छोड़ कर बाकी सेवाओं के लिए धन मुहैया कराना बंद कर देती है। राष्ट्रपति बराक ओबामा (Democrat) और वहां की विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी (Republican Party) के मध्य सहमति न बन पाने की वजह से संघीय बजट को तय समय सीमा के भीतर मंजूरी नहीं मिल पाने के कारण यह स्थिति आई है। अमेरिका में वित्तीय वर्ष 30 सितंबर को समाप्त होता है, लेकिन अमेरिकी सीनेट (Senate) और प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) इस समय सीमा के बीत जाने के बाद भी बजट पारित नहीं कर सकी हैं। दरअसल रिपब्लिकन पार्टी ने बजट पारित कराने के लिए यह शर्त रखी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अपनी महत्वाकांक्षी हेल्थकेयर योजना (Obamacare) के प्रमुख हिस्सों को एक साल के लिए टाल दें। लेकिन ओबामा इसके लिए राजी नहीं हैं।
 
अमेरिकी बांड्स की यील्ड पर प्रभाव
अमेरिकी बांड्स (Bonds) की यील्ड (Yield) पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के पिछले संकटों के दौरान अमेरिकी की दस साल की ट्रेजरी बांड्स की यील्ड अधिकतम 100 बेसिस प्वाइंट्स तक गिरी है। मौजूदा स्थिति यह है कि यह सितंबर के अपने उच्चतम स्तर से 40 बेसिस प्वाइंट्स नीचे है। लेकिन कतई नहीं कहा जा सकता कि यह पूरी की पूरी गिरावट शटडाउन की वजह से ही हुई है। इसमें कुछ योगदान फेड द्वारा बांडों की खरीद जारी रखने के फैसले का भी है। जानकार मानते हैं कि यदि संकट कुछ और दिन चला तो इसमें 30-40 बेसिस प्वाइंट्स की गिरावट और आ सकती है।

जीडीपी ग्रोथ और डेट रेटिंग पर असर

अगला सवाल यह है कि अमेरिका की जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) पर इसका क्या असर होगा? जानकारों का मानना है कि शटडाउन जारी रहने की स्थिति में जीडीपी ग्रोथ की दर में हर हफ्ते 0.1 फीसदी से 0.2 फीसदी तक की गिरावट आती जाएगी। लेकिन असलियत यह है कि शटडाउन का यह सिलसिला अधिक लंबा नहीं चलेगा। इसके अलावा विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि शटडाउन की वजह से अमेरिका की डेट रेटिंग (Debt rating) पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि अमेरिकी सॉवरेन डेट के लिए एसएंडपी (S&P) की रेटिंग एए+ (AA+) है।  

सोने की कीमत में गिरावट या तेजी

सरकारी शटडाउन को अमेरिकी अर्थव्यवस्था के अपस्फीति कारक के तौर पर देखा जा रहा है। यह सोने के लिए नकारात्मक स्थिति है क्योंकि इसे मुद्रास्फीति (Inflation) के विरुद्ध हेजिंग (Hedging) के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि शटडाउन के बावजूद सोने में तेजी का रुख नहीं देखा जा रहा। यह खबर आने के बाद सोने की कीमत पिछले हफ्ते की शुरुआत में 1280 डॉलर प्रति औंस तक लुढ़क गईं, हालांकि शुक्रवार को सोना 1316 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। जानकारों का मानना है कि संघीय कर्ज की सीमा से संबंधित संकट गहराने की स्थिति में सोने में तेजी का रुख आ सकता है।  

शेयर बाजार पर असर

शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि शटडाउन का अमेरिकी बाजारों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। पिछले कई दशकों के शटडाउन और शेयर बाजार के प्रदर्शन की बात करें तो शटडाउन से पहले बाजार में कुछ गिरावट अवश्य आती है लेकिन बाद में बाजार रिकवरी करने में कामयाब रहता है। जानकारों के अनुसार, अमेरिकी बाजार में तेजी का रुख जारी रहने की संभावना है, हालांकि शटडाउन की वजह से बाजारों में 5-7 फीसदी की करेक्शन आ सकती है। 

भारतीय निवेशकों पर प्रभाव

अमेरिकी सरकार के शटडाउन का भारतीय निवेशकों पर अभी तक कोई असर नहीं है, लेकिन यदि यह संकट लंबा चला तो भारतीय निवेशकों के लिए यह अच्छी बात होगी। यह शटडाउन अधिक लंबा खिंचने की स्थिति में अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर उतना ही खराब असर पड़ेगा। ऐसी स्थिति में अमेरिकी फेडरल रिजर्व को बांड खरीद के कार्यक्रम को और अधिक समय तक जारी रखना होगा, जो भारतीय बाजारों और निवेशकों के लिए शुभ संकेत होगा। गौरतलब है कि इस खरीदारी की समाप्ति के अंदेशे की वजह से डॉलर के मुकाबले रुपया अगस्त में ऐतिहासिक रूप से निचले स्तरों पर चला गया था। यही नहीं, फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा यह कार्यक्रम जारी रखने की घोषणा के बाद रुपए में अपने निचले स्तरों से दस फीसदी की मजबूती आई है।

भारत के निर्यात पर असर

अमेरिकी शटडाउन की वजह से भारतीय आईटी कंपनियों में से अधिकांश के ऊपर न्यूनतम असर होने की संभावना है। इसकी वजह यह है कि अमेरिकी संघीय ठेकों पर भारतीय आईटी कंपनियों की काफी कम निर्भरता है, ऐसे में इनको कोई खास नुकसान नहीं होने वाला है। हालांकि इसकी वजह से अमेरिका को किए जाने वाले भारतीय निर्यात पर असर पड़ेगा, लेकिन यह नुकसान अधिक होने के आसार नहीं हैं। इंजीनियरिंग एक्सपोर्टर्स के संगठन ईईपीसी इंडिया (EEPC India) का कहना है कि वाणिज्यिक बंदरगाह आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में नहीं आते, ऐसे में कर्मचारियों की कमी की वजह से बंदरगाहों से संबंधित सेवाओं जैसे सामानों की क्लियरिंग आदि में देरी होने की संभावना है। निर्यातकों को इससे नुकसान होगा। गौरतलब है कि साल 2012-13 में भारत द्वारा अमेरिका को किया गया निर्यात 36 अरब डॉलर रहा था।   

(पांच अक्टूबर 2013 को लिखा गया लेख)

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