Friday, October 18, 2013

बीमा में नए सुधारों का दौर!



बीमा क्षेत्र की नियामक संस्था बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (Irda) ने नए कलेवर वाले जीवन बीमा उत्पादों से संबंधित नियमों को लागू किए जाने की समय सीमा तीन महीने के लिए बढ़ा दी है। जीवन बीमा कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन जीवन बीमा परिषद (Life Insurance Council) ने इससे पहले इरडा से इस समय सीमा को बढ़ाने की गुजारिश की थी। समय सीमा बढ़ने का मतलब यह है कि जीवन बीमा कंपनियां (Life Insurance Companies) अगले तीन महीनों तक अपनी मौजूदा जीवन बीमा पॉलिसियां बेच सकेंगी। जानकारों के अनुसार यदि समय सीमा नहीं बढ़ाई जाती तो बीमा ग्राहकों के पास चयन के लिए काफी कम उत्पाद उपलब्ध होते। 

इरडा के इस निर्णय के बाद विभिन्न जीवन बीमा कंपनियों ने राहत की सांस ली है क्योंकि समय सीमा बढ़ने के बाद अब जीवन बीमा कंपनियां पुरानी योजनाओं को चरणबद्ध ढंग से बंद करते हुए धीरे-धीरे नई योजनाओं को शुरू कर सकती हैं। इरडा ने कहा है कि एक जनवरी 2014 से पुरानी बीमा योजनाओं को पूरी तरह बंद करना होगा।  

हालांकि, बीमा कंपनियों को यह कहा गया है कि वे हाइएस्ट एनएवी गारंटी योजनाएं (Highest NAV Guarantee Schemes) और इंडेक्स-लिंक्ड बीमा योजनाएं एक अक्टूबर से ही बंद कर दें। इन बीमा उत्पादों को छोड़ कर बाकी जीवन बीमा उत्पादों के लिए बीमा नियामक ने यह समय सीमा इसलिए बढ़ाई है क्योंकि अधिकांश बीमा कंपनियों खास तौर पर भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC of India) ने नए नियमों के अनुपालन वाले उत्पाद उसके पास सितंबर के आखिरी हफ्ते में पेश किए। जानकारों का कहना है कि केवल उत्पादों को बेहतर करने से ग्राहकों का भला नहीं होगा। ग्राहकों को वास्तव में लाभ तभी होगा जब बीमा नियामक उत्पादों की बिक्री से जुड़ी गड़बड़ियों पर ध्यान देगा। गौरतलब है कि बीमा क्षेत्र में मिस-सेलिंग (गलत जानकारी दे कर उत्पाद बेच देना) एक गंभीर समस्या है और बीमा नियामक को मिलने वाली शिकायतों में आधे से अधिक इसी से संबंधित होती हैं। 

इसके अलावा बीमा नियामक संस्था ने स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) से संबंधित उन नियमों में कुछ संशोधनों की घोषणा की है जो इसने फरवरी 2013 में अधिसूचित किए थे। इरडा द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि बीमा कंपनियां नॉन-एलोपैथिक उपचार के लिए भी कुछ शर्तों के साथ स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध करा सकती हैं। ऐसे उपचारों के लिए पॉलिसी धारक को स्वास्थ्य बीमा कवर तभी मिल सकेगा यदि उसने किसी सरकारी अस्पताल में अपना उपचार कराया हो या फिर किसी ऐसी संस्था में उपचार कराया हो जो सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हो या क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया/ नेशनल एक्रेडिशन बोर्ड ऑन हेल्थ द्वारा प्रमाणित हो। इस व्याख्या के बाद इससे संबंधित भ्रम समाप्त हो गया है। इसके अलावा इरडा ने कहा है कि अब केवल नई व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में एक फ्री-लुक पीरियड (Free-look Period) होगा, जो उस पॉलिसी की शुरुआत के समय लागू होगा। हालांकि एक साल से कम अवधि वाली नई व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा योजनाएं इस दायरे में नहीं आएंगी। ये बदलाव एक अक्टूबर से लागू हो गए हैं। 

(चार अक्टूबर 2013 को लिखा गया लेख)

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